Monday, June 21, 2010

वो लड़की

आज मैं जिससे मिला वो लड़की दिखने में dusky थी
आवाज़ जो दिल को छू गयी आवाज़ उसकी husky थी
(आज मैं जिससे मिला उस लड़की का रंग गेहूँआ  था
आवाज़ में वो गहराई थी जैसे गहरा भरा कोई कुआँ था)
बाल थे जैसे काली रात के बादलों का झुण्ड
जुबां से गिरते शब्द जैसे अमृत का कुंड
उसकी आँखें कंचे जिसमे दुनिया पूरी समाई
हिलती काली पुतली उसमे जिसमे गंगा सी गहराई
उसके दांत संगे मर-मर चमके तर्रों से चम चम
हर सांस में इतनी खुशबू जीवन को महका दे हर दम
अब न जाने दिल उसको क्यों भूल नहीं पाता है
अन्दर कुछ कुछ कुछ कुछ होता है
बस ध्यान उसी तरफ जाता है

- जितेश मेहता

Monday, June 14, 2010

Divorce / Talaak ek saza

तलाक तो दे रहे हो मुझे गुरुर और  कहर  के साथ
मेरा जवानी भी लौटा दो मेरी मेहर के साथ

दिन लिए, महीने लिए, साल लिए
मेरी शाम भी वापस दे दो मेरी सहर के साथ

अब तिल तिल के जीने से क्या फायदा
साँसे मेरी लौटा दो एक बोतल ज़हर के साथ

तुम्हारा प्यार था मेरे जीवन की बारिश
अब खत्म हो गयीं सारी ख्वाहिश
अब ले गए हो अपनेपन की धुप
मोहब्बत की दोपहर के साथ

तुम्हारे कहते ही कि मैं तुम संग जी न सकूँगा
अब साथ चलोगी तो और थकुंगा
मेरे सपने बह गए जैसे कहीं 
बदनसीबी की नेहर के साथ

तलाक तो दे रहे हो मुझे गुरुर और कहर के साथ

मेरा जवानी भी लौटा दो मेरी मेहर के साथ

-जितेश मेहता

 

Wednesday, June 9, 2010

मज़ेदार ज़िंदगी




बेकार ज़िंदगी खुद्दार ज़िंदगी
फिर भी ना जाने क्यों है मज़ेदार ज़िंदगी

चलती है कभी रो रो के चींटी की चाल
कभी भागे तेज़ हवा सी कमाल
मद्धम कभी है
कभी धुवा धार ज़िंदगी


बेकार ज़िंदगी खुद्दार ज़िंदगी
फिर भी ना जाने क्यों है मज़ेदार ज़िंदगी


चारों तरफ था छाया
बस तुम्हारा ही खुमार
कल भी था और आज भी तुम्हारा इंतेज़ार
तुम थे तो खुशियों से थी बेशुमार ज़िंदगी






बेकार ज़िंदगी खुद्दार ज़िंदगी
फिर भी ना जाने क्यों है मज़ेदार ज़िंदगी






कभी थी खुशियाँ
अब है चारों तरफ छाया गम
जो था कभी
नही अब रहा है वही दम
मजबूरों की बनी इक कतार ज़िंदगी






बेकार ज़िंदगी खुद्दार ज़िंदगी
फिर भी ना जाने क्यों है मज़ेदार ज़िंदगी

-जितेश मेहता

सर ख़रोची की तम्मना

सर ख़रोची की तमन्ना अब हमारे जी में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कैंची में है

आज बतला देंगे sabko himmate marda hain hum 
बाल सर पे जादा हैं to katwaane mein kya sharam
बाल कटवाते ही मज़ा आये है जो AC में है
सर ख़रोची की तमन्ना अब हमारे जी में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कैंची में है

barber बाल काटे कम, है बोले पर बड़ा
फूटता है मोहल्ले के हर issue का उसके यहाँ घड़ा 
बक बक है करता जैसे न्यूज़ किसी TV में है
सर ख़रोची की तमन्ना अब हमारे जी में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कैंची में है


baal lambe rakhna humko bhi hai man par kya kahun 
poora saal garmiyon mein in sang kaise rahun 
lambe baalon ka maza to mausamein sardi mein hai 

सर ख़रोची की तमन्ना अब हमारे जी में है 
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कैंची में है

जितेश मेहता