Monday, June 14, 2010

Divorce / Talaak ek saza

तलाक तो दे रहे हो मुझे गुरुर और  कहर  के साथ
मेरा जवानी भी लौटा दो मेरी मेहर के साथ

दिन लिए, महीने लिए, साल लिए
मेरी शाम भी वापस दे दो मेरी सहर के साथ

अब तिल तिल के जीने से क्या फायदा
साँसे मेरी लौटा दो एक बोतल ज़हर के साथ

तुम्हारा प्यार था मेरे जीवन की बारिश
अब खत्म हो गयीं सारी ख्वाहिश
अब ले गए हो अपनेपन की धुप
मोहब्बत की दोपहर के साथ

तुम्हारे कहते ही कि मैं तुम संग जी न सकूँगा
अब साथ चलोगी तो और थकुंगा
मेरे सपने बह गए जैसे कहीं 
बदनसीबी की नेहर के साथ

तलाक तो दे रहे हो मुझे गुरुर और कहर के साथ

मेरा जवानी भी लौटा दो मेरी मेहर के साथ

-जितेश मेहता

 

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