मैं अपनी बीवी से दूर हूँ
अकेला उदास मजबूर हूँ
सज़ा पा रहा हूँ अकेले
इस सावन में रहने की
लेकिन मैं बिलकुल बेक़सूर हूँ
कब न जाने फिर मिलना होगा
उस हूर से
कब तक निहारूंगा उसे
इतनी दूर से
पर जीवन में ये सब करना पड़ता है
जानता मैं ज़रूर हूँ
मैं अपनी बीवी से दूर हूँ
अकेला उदास मजबूर हूँ
सज़ा पा रहा हूँ अकेले
इस सावन में रहने की
लेकिन मैं बिलकुल बेक़सूर हूँ
जितेश - वसुंधरा सिर्फ तुम्हारा
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